पेनवासी डाॅ. मोतीरावेन कंगाली की याद मे


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गोंडवाना भूमि में पैदा लेने वाले गोंड आदिवासी समाज के महान विद्वान,चिन्तक भाषाविद तिरु.डॉ.मोतिरावण कंगाली का निधन ने पूरे बौद्धिक जगत में एक शोक की लहर बहा दी.मध्यभारत के आदिवासी समाज के जाने माने हस्ताक्षर रहे यह महान शख्सियत ने,महाराष्ट्र,मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़,ओड़िसा,तेलंगाना आंध्रप्रदेश आदि राज्यों में आदिवासियों के बीच रहकर,आदिवासी,बोली-भाषा,लिपि,खान-पान,रहन-सहन,वेश-भूषा,रीति-रिवाज,धार्मिक-आस्था,पर्व-उत्सव या यूं कहा जाए को जन्म से मृत्यु पूरे संस्कार व संस्कृति को साहित्य के माध्यम से रेखांकित किया।  आदिवासी समाज में प्रकाशमान करने वाले इस सूर्य का 30 अक्टूबर 2015 को नागपुर में अस्त हो गया .मोतीरावण कंगाले पूरी दुनिया के एक मात्र ऐसे हस्ती थे जिन्होंने हडप्पा कालीन सैंधवी चित्रात्मक लिपि को गोंडी में पढ़ पाया था. इस हडप्पा कालीन लिपि के गोंडी में उदवाचन ने पूरे वैश्विक जगत के इतिहास,पुरातत्व धर्म,दर्शन विज्ञान में नए सिरे से ज्ञान का उद्गम का रास्ता खोल दिया गया .इस लिपि के ज्ञान से दुनिया के  महान सभ्यता –संस्कृति का ऐतिहासिक पुनर्लेखन का कार्य करने में पुनः मदद मिलेगी .दुनिया के महान इतिहास,संस्कृति इस हडप्पा सभ्यता के केंद्र में दबा है.मूल इतिहास से जुड़े दबे रहस्य से पर्दा उठाने का ठोस मार्ग डॉ. मोतीरावण कंगाली जी दिखाने का कार्य किया.दुनिया भर के इतिहासकार मोहन जोदड़ो –हडप्पा कालीन चित्र लिपि को पढने का जी तोड़ प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल पाया था. जिसे गोंडवाना के लाल ने आदिवासियों की गोंडी भाषा के माध्यम से माध्यम से पढ़कर नए कीर्तिमान स्थापित किए.साथ कई भाषाओँ के जानकार भी थे, गोंड समाज के लिए पहला बेवसाईट इन्होने बनाया, अब देखने वाली बात यह है कि अब इनके कारवां को कौन आगे बढ़ाता है ।
·        परिचय,जन्म-  आचार्य तिरु. मोतिरावण कंगाली का जन्म 02 फरवरी 1949 को महारष्ट्र (विदर्भ) के नागपुर जिले के रामटेक तहसील में स्थित दुलारा नामक ग्राम के टीरकाजी कंगाली परिवार में हुआ था. पिता का नाम छतीराम और माता जी का नाम रायतार थी .बचपन का नाम मोतीराम कंगाली था, बाद में रावण के कार्यों व आदर्शों से परिचित होने के उपरान्त राम को हटाकर रावण कर दिया जिसके बाद फिर मोतीरावण हुआ. ये एक क्रांतिकारी पहल थी.इनकी पत्नी का नाम चित्रलेखा कंगाली है, कंगाली जी के तीन पुत्रियाँ है,बड़ी बेटी में श्रृंखला जो कि (आईएएस) अफसर है, इनसे छोटी बेटी वेरुंजली और सबसे छोटी डॉ.विनीती है.
·        मृत्यु- तिरु. मोतिरावण कंगाली की निधन 66 वर्ष के उम्र  में ह्रदय घात से नागपुर में हो गई.गोंडी विधि विधान से पैत्रिक ग्राम दुलारा में अंतिम संस्कार में किया गया,जिसमें हजारों की संख्या में लोग शामिल हुआ.
·        शिक्षा- आपकी प्राथमिक शिक्षा प्राथमिक शाला कारवाही में हुआ. माध्यमिक की पढ़ाई माध्यमिक शिक्षा आंग्ल पूर्व माध्यमिक शाला बोथिया – पालोरा से हुई. मैट्रिक शिक्षा हडस हाईस्कूल नागपुर,स्नातक की पढ़ाई धरमपेठ महाविद्यालय नागपुर और स्नाकोत्तर राष्ट्रसंत तुकडो जी विश्वविद्यालय नागपुर से  तीन विषयों में समाज विज्ञान,भाषा विज्ञान व अर्थ विज्ञान से पूरा किया।इसके उपरांत आपने “द फ़िलासफिकल बेस आफ ट्राइबल कल्चरल वैह्ल्यूज परटिक्यूलरलि इन रिस्पेक्ट ऑफ गोंड ट्राइब ऑफ सेंट्रल इंडिया” इस विषय पर शोध कार्य किए। इस शोध कार्य को संशोधन कर लिपिबद्ध किया है।
·        नौकरी – भारतीय रिजर्व बैंक में कार्यरत थे,सेवानिवृत्त होकर, गोंडवाना  के लिए अपना कलम चलाया.

·        साहित्य लेखन में योगदान- इनकी महत्वपूर्ण किताब-रचना इस तरह से है- गोंडी भाषा व्याकरण,गोंडी भाषा शब्द –कोष भाग-1 और  भाग- 2, गोंडी भाषा सीखिए,सिन्धु घाटी का गोंडी में उद्वचन,गोंडवाना गढ़ दर्शन,गोडवाना कोटदर्शन,गोंडी नृत्य का पूर्वोतिहास,कुवारा भिमाल  पेन सार,तीन्दाना मांदी,ते वारीना पाटांग,गोंडी लम्क पुन्दान,मुंडारा हीरोगंगा,कोया भीडिता गोंडी सगा बिडार,गोंड वाणी का पूर्वोतिहास,बृहद हिंदी गोंडी शब्दकोष,चांदागढ़ की महाकाली कली, कंकाली,बस्तर की दंतेवाडीन वेनदाई दंतेश्वरी,जंगो दाई एवं ग्रामीण देवी देवताओं के भजन,शम्भु उपासक महाराजा रावण के भजन  ,मराठी गोंडी,हिंदी गोंडी शब्दकोश शब्दकोश गोंडवाना का सांस्कृतिक इतिहास प्रमुख है.
अन्य विशेषताएँ-
·        हड़प्पा लिपि के पढ़ना संभव किया- मोहन जोदडो हड़प्पा कालीन लिपि अब तक कोई इतिहासकार, पुरातत्ववेत्ता अथक प्रयास से नहीं पढ़ पाए थे उसे डॉ. मोतीरावण कंगाली ने पूरा कर दिया इन्होने इस चित्रात्मक सैंधवी लिपि को गोंडी में पढ़ पाया जिसे दाएँ से बाएँ पढ़ी गई। इस तरह पहली बार दुनिया के यह शख्स ने पढ़ा। साथ ही साबित किया है लिपि दाएँ से बाएँ जाएँगे। इस तरह से इस सभ्यता से जुड़े रहस्यों से पर्दा हटाना शुरू किया ही था। यह महान कर बताया कि सैंधवी कालीन लिपि का गोंडी में उदवाचन किया गया, साथ कि इस पर किताब भी लिखा है, जो कि काफी महत्त्वपूर्ण रचना मानी जाती है।   
·        प्रख्यात भाषाविद- तिरु.मोतीरावण कंगाली जी को गोंडी,अंग्रेजी,हिंदी,मराठी,तुल्लू,तोडा,मालतो,कोलमी आदि भाषाओँ के प्रखर मर्मज्ञ थे. गोंडी भाषा व्याकरण,गोंडी भाषा शब्दकोश भाग दो भागों में लिखे है,मराठी - गोंडी व हिंदी -गोंडी बृहद शब्दकोश तैयार किए है.
·        गोंड  समाज को समर्पित पहला वेबसाइड – डॉ. कंगाली ने गोंड आदिवासी के जन्म से लेकर , मृत्यु तक संपूर्ण संस्कार, इनकी आस्था , खान-पान , पेनठाना, पर्व उत्सव, किसी भी कार्य करने के तरीके, इलाज के तरीके, गीत, कुल देवता, ग्राम देवता,गोत्र, टोटम आदि की जानकारी के लिए (jay seva.com) नामक वेबसाईट का निर्माण किया जिसमें गोंड समाज से जुड़े सभी  पहलू पर गहरा प्रकाश डाला है, जिसमें गोंड समाज के संपूर्ण जानकारी उपलब्ध करा दिया गया है,

·        क्षेत्रीयअध्ययनकर्ता- बतौर समाज,मानव,वभाषा वैज्ञानिक आपने महाराष्ट्र,आन्ध्र प्रदेश,तेलंगाना,उड़ीसा,मध्यप्रदेश,छत्तीसगढ़के दुर्गम पहाड़ी,घने जंगलों में सहभागी अवलोकन,साक्षात्कार,आदि पहलुओं से प्राथमिक स्रोत से जानकारी एकत्रित कर गहनशोध अध्ययन स्वरुप आदिवासी लिपि.गोत्र,टोटम,आयुर्वेदिक चिकित्सा,खान –पान धार्मिक विधान, गायता, पुजारी,बैगा, पेनठाना (गोंड पूजा स्थल),उत्सव इस तरह गोंड व इनके और भी उपजातियों पर शोध लेखन किया है।
·        हिन्दू (ब्राह्मणीकरण) का पर्दाफ़ाश – मोतीरावण कंगाली जी  ने अपने अध्ययन पाया कि किस तरह से आदिवासी आस्था का हिंदुकरण ब्राहमनी किया जा रहा है, इसका पर्दाफाश किया जो आदिवासी समाज धार्मिक अस्मिता  की रक्षा है, बताया जाता है कि बस्तर के दंतेवाड़ा स्थित दंतेश्वरी आदिवासी  समाज की है जिससे आदिवासियों की धार्मिक आस्था जुड़ी है, हर वर्ष यहाँ मेला लगता है,डंकनी और शंखनी नदी मे यह  पेनठाना है। आजकल यह हिन्दूकरण, ब्राहमनी के चपेट मे आकर हिन्दू देवी हो गई है,अब दोनों नवरात्र में ज्योति आदि स्थापित किया जाता है। एक तरह से हिन्दू देवी हो गई है। ठीक इसी तरह से बमलेश्वरी माता को भी कंगाली जी आदिवासी आस्था का केंद्र की बात को प्रमुखता से रखा बाद में आज हिंदुकरण का चपेट मे आ गया। इसी तरह से बहुत से आदिवासी देव गुड़ी, ग्राम गुड़ी, पेनठाना का जमकर हिंदुकरण हुया है इनकी बात इन्होने प्रमुखता से उठाया है। किस तरह से आदिवासी धार्मिक स्थल दुर्गा, हनुमान, के रूप ले चुका है उसे प्रमुखता से उठाया है। इस तरह से समाज को जागरूक करने की अग्रसित किए। धार्मिक राजनीतिक को बतलाने का प्रायस किया।
·        पारी कुपार लिंगो गोंडी पुनेम दर्शन- मोतीरावण कंगाली के लिखित “पारी कुपार लिंगो गोंडी पुनेम दर्शन” यह 21 अध्याय एवं 365 पृष्ठों का ग्रंथ कोया वंशीय गंडजीवों का गोंडी पुनेम दर्शन की अनमोल कृति है। इसमें पाहंदी पारी कुमार लिंगों को कोयवंशी आदिवासियों के प्रथम गुरु बताया गया है। इसके अनुसार आर्यों के आगमन के पूर्व पारी कुपार लिंगों ने सर्वप्रथम लोगों को जागृत करने का काम किया।प्रकृति चक्र,जीवन चक्र को वैज्ञानिक पूर्ण लोगों तक पहुंचाने की बात इस किताब मे किया गया है। जो कि लोगों को प्र्कृति से तालमेल पूर्वक जीवन कैसे जीना है इसके बारे इस किताब मे लिखा गया है। इसमें बताया है कि लिंगो के अनुसार प्र्कृति शक्ति ही सर्वोपरि है। लिंगो द्वारा मन पर काबू पाने के उपदेश देने कि बात दिया गया है, भौतिक जगत को बस्तविक माना है पिता व पूर्वजों को शक्ति माना है। लिंगों ने कोयवंशी को सगा , गोठुल,पेनकडा,, पुनेम,और मुठवा इन पांचों मे सीखने को जाने कहा है। इस तरह लिंगो के उपदेश को बताया गया है।
·        आदिवासी अस्मिता के रक्षक- लगातार आदिवासी भाषा- बोली, रहन –सहन, धार्मिक पहचान विलुप्त होने कि खतरा सालों से बनी हुई थी,साथ ही लगातार सांस्कृतिक दहन चालू था। ऐसे विषम समय में डॉ.  मोतिरावण कंगाली का आदिवासी के अस्मिता जागृत कराने वाला कार्य रहा। या यूं कहा जाए को इनका जीवन समाज को समर्पित था। जो काम इन्होने किया किसी कोयवंशी गोंड ने अब तक नहीं किया। यह महान कार्य याद किए जाएँगे।
·        नाम बदलाया- डॉ. मोतीरावण का नाम मोतीराम कंगाली था। लंका के रावण के दक्षता, यश, स्वाभिमान और ज्ञान से परिचित होने के बाद राम को हटाकर रावण इस त्तरह मोतीरावण कर दिया गया। जो कि अपने आप सामाजिक चेतना कि परिचायक है।  क्यूंकि राजा  रावण को गोंड आदिवासी माना जाता है।      -
        -भारतीय रिजर्व बैंक में पदस्थ होने के बावजूद गोंड समाज के लिए जो कार्य किए वह समाज के लिए अफ़ताफ सी चमक है इस चमक से समाज में नई जागृति आएगी। अब जरूरत है इनके कारवां को आगे बढ़ाने की। सचमुच मे तिरु. डॉ. मोतीरावण कंगाली गोंडवाना के युगपुरुष थे और रहेंगे इनके द्वारा किए कार्यों को समाज हमेशा याद करेंगे। साथ ही गोंडवाना की यादों मे यह यह शख्स उदयमान होते रहेंगे। .

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