गोंडी धर्म कोड कि मांग करो
          NRC,NPR,CAA सब जुमला है




हमारे कुछ गोंडो को जादा अक्कल है, भारत का मुलबिज, मुलनिवासी होने के बावजूद वह एनआरसी /सी एए/एन पी आर के तहद नागरिकता के नाम पर और धर्म के नाम पर अपनी गिनती मनुवादीयों से उनके 6 धर्म में करवाना चाहता है ।जमीन संबंधित इंग्रेज सरकार के कई ऐसे कानुन थे जो लेवी, लगान, टैक्स वसूल करने के लिए उन्होने बनाये थे ।
उस वक्त कितने गोंडोने अपनी जमीन इंग्रेज दरबार में रजिस्टर की थी अब गोंड समाज कोणसा जमीन का तुकडा सबुत के तौर पर एनआरसी/सीएए में पेश करेगा और कितने गोंड करेंगे ।
ओर तो और गोंडो को एनपीआर में धर्म कोड लिखने में कोई कागजात नही देना पडेगा लेकिन कोया पुनेम, गोंडी धर्म, सरना धर्म, आदिवासी धर्म, ट्राइबल रिलिझन यह धर्म कोड नही रहेंगे ।कितनी विडंबना है कि यह धर्म की मांग करने वाले सब भारत के मुलनिवासी, मुलबिज है ।उपर के कुछ धर्म कि स्थापना इस देश में हुई नही ।आर्य यूरेशिया से आये,मुगल मुस्लिम देशो से आये, ख्रिच्छन, ईसाई ब्रिटेन से ।

धर्मो के नाम पर आदिवासी का उत्पीड़न हो रहा है ।
फिर हमारे आदिवासी भाई उनके धर्म के झंडे, दंडे धरने के लिए आगे ।अपना नाम हिंदू कोड में लिखने के लिए और अपना सर्वेक्षण मनुवादी व्दारा कराने के लिए उत्तेजित है ।
अपने आपको डिटेंशन कैंप में पिटवाने कि मत सोचो ।
इतिहास गवाह है,  जब संविधान सभा में डॉ बाबासाहाब आंबेडकर को चुनकर देना था ।तो सभी कांग्रेसीने विरोध किया था ।याहा तक कहॉ गया था कि डॉ बाबासाहाब आंबेडकर के लिए  संविधान सभा के सभी दरवाजे और खिडकियॉ बंद है ।
महाराष्ट्र में भंडारा जिल्हासे डॉ बाबासाहाब आंबेडकर चुनाव हार गये थे ।
तब जाकर जोगेन्दर मंडल साहाब ने पच्छिम बंगाल से अपनी सीट से जेस्सोर और खुलना जिल्हा से चुनाव जितवाया था ओैर डॉ बाबासाहाब आंबेडकर संविधान सभा में पोहचे थे ।संविधान बना लेकिन जब पाकिस्तान अलग हुवा,तब जेस्सोर और खुलना यह दोन्हो जिल्हा पाकिस्तान में विलीन किये, ताकी डॉ बाबासाहाब आंबेडकर भविष्य में कभी चुनकर न आये ।
जो बंगाली लोग भारत में रहना चाहते थे उनको जहॉ जहॉ गोंड लोग जादा रहते थे उस क्षेत्र में ,या देश के ट्राइबल जिल्हो में "बंगाली रिफीज्यू कैंप "में बीठायॉ गया ।
ऐसे बंगाली लोंगो को केंद्र सरकारने उनके उधरनिर्वाह के लिए जमीने दी, नोकरी में सवलते दी ।
महाराष्ट्र में चांदागढ (चंद्रपूर जिल्हा) गोंड राजाओं के नाम पर जाना जाता है ।इस जिल्हे में कई ऐसे क्षेत्र है जो 5वी अनुसूची में आते है ऐसे क्षेत्र में भी बंगाली लोंगो के रिफिज्यू कैंप बनाये गये ।
चामोर्सी तालुका, भद्रावती शहर में, चंद्रपूर शहर में बंगाली कैंप, बाजार पेठ के नाम पर मशहूर है ।गोंड राजा के राजधानी में बंगालीयों का मच्छली बाजार फेमस है ।चंद्रपूर के उद्योगीक क्षेत्र में यही लोग सर्व्हीस पर है ।कोल माईन्स,(कोयला खदान) पॉवर हाऊस,सिमेंट फैक्टरी में यही लोग हैं ।
बंगाली लोग गोंडो से कई गुना आर्थिक दृष्टीसे, समाजिक दृष्टीसे, राजकीय दृष्टीसे आगे निकल गये है ।
अब इन बंगाली से गोंडो पर अन्याय हत्याचार हो रहे हैं ।
यही हाल आपके छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश का है ।
  क्या छत्तीसगढ़, एमपी में गोंड नही रहते? 
NRC /CAB/CAA और NPR 
का हम क्यो समर्थन करे ।
एनआरसी/सीएए में बाहरी देश के मुस्लिम छोडकर बाकी सभी धर्म के लोगो को नागरिकता देने कि बात है ।


NRC/CAA में नागरिकता सिध्द नही करने वाले गोंड और गैरगोंडो  को, अदर धर्मीय के डिटेंशन सेंटर कहॉ बनेंगे, हो सकता है ट्राइबल क्षेत्रो में ही बनेंगे ।
समझ में नही आता NRC/CAAके लिए और NPR के लिए गोंड क्यु सर्वेक्षण के समर्थन में उछल कूद कर रहा है ।जब की उसका धर्म कोड एन पी आर में नही है ।सन 1951से जनगणना रजिस्टर से आदिवासी, ट्राइबल का धर्म कोड कॉलम हटा दिया गया है ।धर्म कोड हटा देने से आज देश के 13 करोड़ आदिवासी ,ट्राइबल को अपने अपने 6धर्म में आदिवासीयों को धर्मांन्तरित करने की खुली छुट दी गई है । 13 नबंर के कॉलम में स्पष्ट लिखा है कि अनुसूचित जाती हिंदू धर्म, सिख धर्म और बौद्ध धर्म में पाये जाते है ।
अनुसूचित जनजाति सभी धर्म में पाये जाते है ।
इसलिए आदिवासीयों पर धार्मिक हमले होते है । 6 धर्म में नाम दर्ज करने
 से गोंडो का कौणसा भला होने वाला है? क्या इससे गोंडो को राजपाट मिलने वाला है?
भारत में छत्तीसगढ़ के बाद पूर्वोत्तर राज्यो में ट्राइबल का जनसंख्या का परसेंट जादा है ।जाहिर है कि
NRC/CAA से पूर्वोत्तर राज्यो के ट्राइबल जादा प्रताड़ित होंगे क्योंकि इस राज्यो में ट्राइबल जादा है चाहे वह कोई भी धर्म के हो ।इस का मतलब यह हुवा कि जिस धर्म की सत्ता होगी वह शासक वर्ग धर्मान्तरित आदिवासियों को प्रताडीत करेगा।
आज भारत में हिंदूओं कि सत्ता है तो बाकी धर्म में धर्मांतरित आदिवासी प्रताड़ित होंगे ।
कल कोई मुस्लिम कि सत्ता आती है तो धर्मान्तरित आदिवासी ही प्रताड़ित होंगे ।
पुरे देश में NRC /CAA  होगा तो क्या 5वी अनुसूची का गोंड और विस्तारित क्षेत्र का गोंड बचेगा क्या?
नही..
उसे भी इस समस्या से गुजरना पड़ेगा ।
लेकिन हमे मुस्लिम के व्देष में उलझाये जा रहा है ।और हमे दूसरे धर्म का झेंडा पकड़ने में मजा आता है ।
गोंडो को धर्मान्तरीत तो किया जा रहा है साथो साथ हिंदू धर्म के रक्षा के लिए गोंडो का उपयोग किया जा रहा है ।इसके लिए गोंडो का ब्रेन वाश किया जा रहा है ।जंगल के आदिवासी क्षेत्र में हनुमान, राम, और हिंदू देवी देवता के मंदिर बांधे जा रहे हैं ।
ताकी आदिवासी धर्म के नशा में उलझा रहे और पुंजीपती वहॉ की जल, जंगल, जमीन कब्जा करे और मूल्यवान खनिज संपत्ति का दोहन करे ।इनके यह कारनामो से
गोंड अपनी रूढी-परपंरा,बोली-भाषा, धर्म संस्कृति, आदि भुलते चला जा रहा है ।
मुनूवादी यही चाहते हैं ।गोंड हिंदू धर्म में धर्मांतरित हो ।
इसलिए  NPR  में (जनगणना 20-21में)
गोंडो को गोंडी धर्म कोड नही दिया है ।
फिर भी कुछ गोंड NRC/CAAऔर NPR के लिए खुश हैं,
देश के करोड़ो ट्राइबल कि जनगणना देश में मौजूदा धर्म में होंगी जबकी कुछ धर्म बाहरी देश के है ।भारत में कुछ धर्म की स्थापना हि नही हुई ।
अब बताओ मुझे भारत में गोंड था पुर्वसे कि धर्म...
 पृथ्वी पर मुनष्य पहले आया कि धर्म...
मनुष्य धर्म के लिए नही होता,
फिर क्यों गोंडो को धर्मोमें उलझाके धर्मान्तरीत किया जा रहा है ।
गोंडोने समझना चाहिए की,
गोंडो कि भी सामाजिक, राजनितीक, धार्मिक, वैभवशाली, प्रभावशाली, गणव्यवस्था ,राजव्यवस्था थी ।
पुर्वेसे आर्य इस व्यवस्था को उदध्वस्त करते आ रहे ।
जैसे जैसै गोंडो की उच्च कोटी कि सामाजिक व्यवस्था,उनकी धार्मिक संस्कृति नष्ट होती गई वैसे वैसे गोंडो का राजपाट गया, गोंड बरबाद हुये ।
जिस आर्य को गोंड राजाओंने भारत में पाव रखने के लिए एक गज ज़मीन दिया ।
वही आज गोंडो कि नागरिकता सिध्द करने में लगे है ।

गोंड NPR का, जनगणना 20-21का विरोध नही करता है ।
बेशक गोंडो का घर-व्दार, जमीन, जायदाद, प्रौपर्टी की गणना हो,उसकी लोकसंख्या कि भी जनगणना हो लेकिन भारत के मौजूदा धर्म में क्यों?  गोंड समुदाय कि रूढी -प्रथा, परपंरा, बोली -भाषा, नृत्य-संस्कृति, धर्म संस्कृति भारत के मौजूदा धर्म के साथ मेल खाती है क्या ?
इंग्रेजोंने 1871से 1941तक गोंड समुदाय को क्यों अलग धार्मिक कोड कॉलम में जनगणना कि थी?
सन 1951से भारत सरकारने ट्राइबल को अलग ट्राइबल कोड कॉलम में नही गिनने के वजह से आदिवासियों पर धर्मान्तरन के लिए धर्म के धार्मिक आक्रमण बडे है ।
जिस से ट्राइबल कि जनसंख्या घट गई इस का परिणाम आरक्षण पर हुवा क्योंकि जिसकि जितनी संख्या भारी उतनी उसकी भागीदारी ।यही मुल आधार आरक्षण का है ।
ट्राइबल का कोड कॉलम हटाने से सभी धर्मो को आदिवासीयों का धर्मान्तरण करने की छूट मिली है,
आप NPR में 13 नंबर का कॉलम देख सकते है ।
इंग्रेज कि जनगणना में हमे Aborigine, aboriginal, Animist, animism, Tribal Religion से जाना जाता था ।
अब क्यों गोंड समुदाय को हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध में गीना जा रहा है?
क्यों गोंडो को धार्मिक उलझनों में फसाकर उसके कौम को नष्ट किया जा रहा है ।
मेरे गोंडीयन भाई,
इन धर्मो की चाल को समझो ,
कल यही सब धर्म संयुक्त राष्ट्र संघ (युनो में) कहेंगे भारत में मुलनिवासी गोंड समुदाय ,ट्राइबल था ।
लेकिन अब वह भारत के मौजूदा सभी धर्म में शामिल होकर अब कोई ट्राइबल भारत में बच्चा नही है ।
इसलिए भारत में कोई ट्राइबल रहता नही ।
इस के पहले युनो में भारत सरकार ने इस तरह का बयान दिया है ।
इसलिए सभी गोंड समुदाय ने जागृत होना चाहिए ।
और जनगणना 20-21में गोंडी धर्म कॉलम कि मांग करना चाहिए ,
17/18 फरवरी 2020 को दिल्ली में धार्मिक कॉलम के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है ।

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