पृथक गोंडवाना राष्ट्र के लिए10साल का आरक्षण दिया गया था।

अब गोंडवाना राष्ट्र चाहिए,आरक्षण नहीं।


25-जुलाई-1947 को दिल्ली के रामलीला मैदान में वर्तमान भारत गणतन्त्र के -565 रियासतों के राजाओं की मीटिंग ब्रिटिश वायसराय -"लार्ड मांऊटबेटन" की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।

जिसमें सभी राजा-रजवाड़ों ने अपना "सम्राज्य" की संविलियन किए जाने की बात स्वीकृति प्रदान किए और "निर्णय" लिया गया कि-सभी रियासतों को मिलाकर 3-राष्ट्र का निर्माण किया जाये।जिसमें-(1).प्रथक मुस्लिम राष्ट्र-18-रियासतों के साथ    "पाकिस्तान," (2). प्रथक गोंडवाना राष्ट्र-258-रियासतों के साथ "गोंडवाना राष्ट्र," और (3).शेष रियासतों का अलग राष्ट्र होगा।
इन सभी राष्ट्र-निर्माण की प्रस्तावना ब्रिटिश- वायसराय-"लार्ड-आर्किबाल्ड बवेल" ने पूर्व में ही निर्धारित कर दिया था।केवल सभी राजाओं का "एग्रीमेंट" होना बाकि था।
            अंततः सहमति होने पर मान लिया गया और राष्ट्र दिया जाने लगा तो महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू ने "गोंडवाना राष्ट्र" 10-साल बाद ''गोंडवाना वासियों" को शिक्षित कर,''राष्ट्र"प्रदान करने की बात स्वीकार किए।

               इसतरह "The Independent Act_1947" की सेक्शन-7_c के आधार पर "ट्रांसफर आफ पावर एग्रीमेंट" किया गया।*
  
जो आज भी हमें आरक्षण के तौर पर* *"राष्ट्र"* *देने के वजाय 10 -10 साल में "पढ़ाने के नाम पर आरक्षण बढ़ाया जाता है।ताकि* *"राष्ट्र"* *न देना पड़े*।

       यह *आरक्षण* *खैरात में नहीं मिला, बल्कि* *अपने राज्य में दूसरे लोगों को राज्य कराये जाने का समझौता है।* 
*जो रेवेन्यू लीज के आधार पर-1969 में खत्म हो जाता है।

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