होली कोई त्योहार नहीं, शाहदत है।
होलिका हम सर्मिंदा है तेरे कातिल जिंदा है।
प्रह्लाद के पिता का नाम
हिरण्यकश्यप था। हिरण्यकश्यप हरिद्रोही
अर्थात *आज का आधुनिक हरिदोई जिला जो उत्तर प्रदेश में है ; वहाँ का राजा था |*
( हरि = ईश्वर और द्रोही = द्रोह करने वाला यानि यहाँ के लोग ईश्वर को नहीं मानते थे )
हिरण्यकश्यप की एक बहन थी, जिसका नाम होलिका था।
*👉🏻होलिका युवा और बहादुर*
*लड़की थी। वह आर्यों से युद्ध में हिरण्यकश्यप के समान ही*
*लड़ती थी।*
हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद
निकम्मा और अवज्ञाकारी था।
आर्यों ने उसे सुरा (शराब ) पिला- पिलाकर नशेड़ी बना दिया था।
जिससे वह आर्यों का दास (भक्त) बन गया था।
नशेड़ी हो जाने के कारण
वह अपने नशेड़ी साथियों के
साथ बस्ती से बाहर ही
रहता था।
👉🏻पुत्र मोह के कारण प्रह्लाद की माॅ अपनी ननद होलिका से उसके लिए खाना (भोजन) भेजवा दिया करती थी।
एक दिन होलिका शाम के समय जब उसे भोजन देने गयी तो नशेड़ी आर्यों ने उसके साथ बदसलूकी की और फिर
उसे जलाकर मार डाला।
प्रातः तक जब होलिका घर न
पहुॅची , तब राजा को बताया गया।
राजा ने पता लगवाया तो
मालूम हुआ कि शाम को
होलिका इधर गयी थी लेकिन
वापस नहीं आई।
तब राजा ने उस क्षेत्र के आर्यों
को पकड़वाकर और उनके मुॅह पर कालिख पोतवाकर ,माथे पर कटार या तलवार से चिन्ह बनवा दिया और घोषित कर दिया कि ये कायर लोग हैं।
👉🏻साहित्य में "वीर" शब्द का अर्थ है --- बहादुर या बलवान।
*वीर के आगे 'अ' लगाने पर*
*"अवीर" हो जाता है।*
*अवीर का मतलब ---*
*कायर या बुजदिल।*
*👉🏻होली के दिन लोग माथे पर जो लाल -हरा- पीला रंग*
*लगाते हैं उसे "अवीर" कहते हैं।*
*👉🏻यानि कि इस देश के सभी लोग "होली" के दिन अपनी बहन /बुआ का शहादत दिवस मनाने के बजाय खुशी -खुशी स्वयं से "कायर" बनते हैं और खुशियाँ भी मनाते है |*
अवीर लगाना कायरता की निशानी है। *sc,st,obc,minority* को यह नहीं लगाना चाहिए।
न ही होली में खुशियाॅ
मनानी चाहिए।
👉🏻बल्कि *sc,st,obc,minority* को होली को होलिका शहादत- दिवस के रूप में मनाना चाहिए।
जिस समय यह घटना घटी थी,
उस समय जातियाॅ नहीं थीं।
जातियां बाद में बनी।
इस कारण होलिका ( DNA रिपोर्ट के अनुसार ) सभी *st,sc obc,minority* की बहन/बुआ हुई ।
*👉🏻जो अपने को हिन्दू समझते हैं, वे आज भी रात्रि में अपना मुर्दा नहीं जलाते हैं।*
होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में स्वयं नहीं बैठी थी। यदि गोद में लेकर बैठी होती तो दोनों जलकर राख हो जाते।
👉🏻ऐसा असम्भव है कि साथ -साथ बैठे व्यक्ति में से एक न जले।
हमारा समाज कुछ पढ़ना नहीं चाहता , जिससे उसे अपने इतिहास की जानकारी नहीं हो पा रही है। जानकारी के अभाव में अपने पूर्वजों के हत्यारों राम ,दुर्गा आदि की जय जयकार करता है।
पाठकों को इस पर चिन्तन करना चाहिए ।
✍🏻लोगों से एक अपील
*******************
आप सभी लोग होलिका दहन के दिन "होलिका शहादत दिवस" मनायें | आप घर, गाँव, शहर में नहीं मना सकते तो कम से कम शोसल मीडिया ( फेसबुक, ट्वीटर, वाट्सअप इत्यादि ) के द्वारा तो मना ही सकते है |
सोचिए....
हर *sc,st,obc,minority* के टाइमलाइन पर उस दिन "होलिका शहादत दिवस"
का मैसेज, वाट्सअप स्टेटस और मैसेज होलिका शहादत दिवस पर रहेगा तो कितना प्रभाव पड़ेगा |
एक छोटी सी कोशिश करके तो देखिए.....
*THE 👊🏻 ULTIMATE FIGHTER'S INDIA*
*GONDWANA STUDENT UNION*
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हिरण्यकश्यप था। हिरण्यकश्यप हरिद्रोही
अर्थात *आज का आधुनिक हरिदोई जिला जो उत्तर प्रदेश में है ; वहाँ का राजा था |*
( हरि = ईश्वर और द्रोही = द्रोह करने वाला यानि यहाँ के लोग ईश्वर को नहीं मानते थे )
हिरण्यकश्यप की एक बहन थी, जिसका नाम होलिका था।
*👉🏻होलिका युवा और बहादुर*
*लड़की थी। वह आर्यों से युद्ध में हिरण्यकश्यप के समान ही*
*लड़ती थी।*
हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रह्लाद
निकम्मा और अवज्ञाकारी था।
आर्यों ने उसे सुरा (शराब ) पिला- पिलाकर नशेड़ी बना दिया था।
जिससे वह आर्यों का दास (भक्त) बन गया था।
नशेड़ी हो जाने के कारण
वह अपने नशेड़ी साथियों के
साथ बस्ती से बाहर ही
रहता था।
👉🏻पुत्र मोह के कारण प्रह्लाद की माॅ अपनी ननद होलिका से उसके लिए खाना (भोजन) भेजवा दिया करती थी।
एक दिन होलिका शाम के समय जब उसे भोजन देने गयी तो नशेड़ी आर्यों ने उसके साथ बदसलूकी की और फिर
उसे जलाकर मार डाला।
प्रातः तक जब होलिका घर न
पहुॅची , तब राजा को बताया गया।
राजा ने पता लगवाया तो
मालूम हुआ कि शाम को
होलिका इधर गयी थी लेकिन
वापस नहीं आई।
तब राजा ने उस क्षेत्र के आर्यों
को पकड़वाकर और उनके मुॅह पर कालिख पोतवाकर ,माथे पर कटार या तलवार से चिन्ह बनवा दिया और घोषित कर दिया कि ये कायर लोग हैं।
👉🏻साहित्य में "वीर" शब्द का अर्थ है --- बहादुर या बलवान।
*वीर के आगे 'अ' लगाने पर*
*"अवीर" हो जाता है।*
*अवीर का मतलब ---*
*कायर या बुजदिल।*
*👉🏻होली के दिन लोग माथे पर जो लाल -हरा- पीला रंग*
*लगाते हैं उसे "अवीर" कहते हैं।*
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अवीर लगाना कायरता की निशानी है। *sc,st,obc,minority* को यह नहीं लगाना चाहिए।
न ही होली में खुशियाॅ
मनानी चाहिए।
👉🏻बल्कि *sc,st,obc,minority* को होली को होलिका शहादत- दिवस के रूप में मनाना चाहिए।
जिस समय यह घटना घटी थी,
उस समय जातियाॅ नहीं थीं।
जातियां बाद में बनी।
इस कारण होलिका ( DNA रिपोर्ट के अनुसार ) सभी *st,sc obc,minority* की बहन/बुआ हुई ।
*👉🏻जो अपने को हिन्दू समझते हैं, वे आज भी रात्रि में अपना मुर्दा नहीं जलाते हैं।*
होलिका प्रह्लाद को गोद में लेकर अग्नि में स्वयं नहीं बैठी थी। यदि गोद में लेकर बैठी होती तो दोनों जलकर राख हो जाते।
👉🏻ऐसा असम्भव है कि साथ -साथ बैठे व्यक्ति में से एक न जले।
हमारा समाज कुछ पढ़ना नहीं चाहता , जिससे उसे अपने इतिहास की जानकारी नहीं हो पा रही है। जानकारी के अभाव में अपने पूर्वजों के हत्यारों राम ,दुर्गा आदि की जय जयकार करता है।
पाठकों को इस पर चिन्तन करना चाहिए ।
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