हम सब कोया पुनेमी हैं,सब कोईतूर है, विभिन्न क्षेत्र और विभिन्न नाम एक पेन। (प्रकृति शक्ति ही सर्वोच्च शक्ति है)
सभी धर्म अपने मानने वालों तक सीमित है, पर कोया पुनेम से संपूर्ण जीव जगत संचालित होता है।
प्रकृति शक्ति को विभिन्न नामों से विभिन्न क्षेत्रों में कोईतूर पूजते है जैसे.... (पुनेमी देवरावेन)
👉बैतूल,छिंदवाड़ा,नागपुर में "बड़ादेव, फड़ापेन"।
👉सिवनी,बालाघाट में "सजोर पेन"।
👉मंडला में "बड़े पेन"।
👉जबलपुर,शहडोल,सीधी,सरगुजा,छत्तीसगढ़,में "बूढ़ा ल पेन"।
👉आंध्रप्रदेश में "परसा पेन"।
👉 गड़चिरोली में "हजोर पेन"।
👉अमरावती में "कोरुक पेन"।
👉छोटा नागपुर में "मारांग बुरू पेन"।
👉संभलपुर में "सिंगा बोगा पेन"।
👉खंडवा झाबुआ में "भिलोटा पेन" आदि नामों से संबोधित कर उनकी उपासना करते हैं।
सुंदर मैदान नदी किनारे पहाड़ी की चोटी आदि एकांत स्थल में साजा महुआ या सरई के पेड़ तले फड़ा पेन का देव खरीयान, पेन ठाना, पेन कड़ा, या सरना स्थल, होता है। देवखरीयान में फड़ापेन के सल्लां और गांगरा प्रतिको के साथ पलों8,पुंगार, चाऊर माट्या आदि उसका साज सिंगार और बाना होता है।
कोया पुनेम दर्शन के अनुसार संपूर्ण संसार की सर्वोच्च शक्ति फड़ा पेन को ही माना गया है।
अगर आपसे कोई पूछे कि आप कौन हो?
तो आपका जवाब," हम कोईतूर हैं।" ये होना चाहिए।
हम सब एक ही शक्ति के उपासक हैं।
अलग-अलग जाति पंथ में विभाजित होकर अपने अस्तित्व को खत्म ना करें, अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हम सभी कोईतुरों को एक होना पड़ेगा।
🖋️ देवरावेन भलावी
👉बैतूल,छिंदवाड़ा,नागपुर में "बड़ादेव, फड़ापेन"।
👉सिवनी,बालाघाट में "सजोर पेन"।
👉मंडला में "बड़े पेन"।
👉जबलपुर,शहडोल,सीधी,सरगुजा,छत्तीसगढ़,में "बूढ़ा ल पेन"।
👉आंध्रप्रदेश में "परसा पेन"।
👉 गड़चिरोली में "हजोर पेन"।
👉अमरावती में "कोरुक पेन"।
👉छोटा नागपुर में "मारांग बुरू पेन"।
👉संभलपुर में "सिंगा बोगा पेन"।
👉खंडवा झाबुआ में "भिलोटा पेन" आदि नामों से संबोधित कर उनकी उपासना करते हैं।
सुंदर मैदान नदी किनारे पहाड़ी की चोटी आदि एकांत स्थल में साजा महुआ या सरई के पेड़ तले फड़ा पेन का देव खरीयान, पेन ठाना, पेन कड़ा, या सरना स्थल, होता है। देवखरीयान में फड़ापेन के सल्लां और गांगरा प्रतिको के साथ पलों8,पुंगार, चाऊर माट्या आदि उसका साज सिंगार और बाना होता है।
कोया पुनेम दर्शन के अनुसार संपूर्ण संसार की सर्वोच्च शक्ति फड़ा पेन को ही माना गया है।
अगर आपसे कोई पूछे कि आप कौन हो?
तो आपका जवाब," हम कोईतूर हैं।" ये होना चाहिए।
हम सब एक ही शक्ति के उपासक हैं।
अलग-अलग जाति पंथ में विभाजित होकर अपने अस्तित्व को खत्म ना करें, अपनी संस्कृति को बचाने के लिए हम सभी कोईतुरों को एक होना पड़ेगा।
🖋️ देवरावेन भलावी



Comments
Post a Comment